
BCCI भारतीय क्रिकेट के अलग अलग हिस्सों को एक व्यवस्था के तहत जोड़ने की तैयारी कर रहा है। बोर्ड पहली बार डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट का पद बनाने पर काम कर रहा है और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख VVS लक्ष्मण को इस जिम्मेदारी के लिए प्रमुख उम्मीदवार माना जा रहा है।
योजना के तहत लक्ष्मण का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। नई भूमिका मिलने पर वह जूनियर क्रिकेट से लेकर सीनियर टीम तक के बीच समन्वय पर नजर रखेंगे।
एक ही भूमिका से जुड़ेगा भारतीय क्रिकेट का पूरा ढांचा
BCCI में फिलहाल सीनियर टीम, चयन समिति, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और आयु वर्ग क्रिकेट अलग अलग स्तर पर काम करते हैं। डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट का पद इन सभी इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
लक्ष्मण की जिम्मेदारी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान से लेकर उन्हें सीनियर स्तर के लिए तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना होगी। इसके साथ वह विभिन्न टीमों के कोच और सपोर्ट स्टाफ के काम में भी समन्वय बनाएंगे।
नई जिम्मेदारी के तहत खिलाड़ियों के रिहैब, ट्रेनिंग, विकास और कोचिंग व्यवस्था पर भी उनकी नजर रहेगी। पुरुष और महिला क्रिकेट से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में भी उनकी भूमिका बढ़ सकती है।
गंभीर और अगरकर की जिम्मेदारियां नहीं बदलेंगी
नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद गौतम गंभीर भारतीय टीम के हेड कोच और अजीत अगरकर मुख्य चयनकर्ता बने रहेंगे। दोनों की वर्तमान भूमिकाओं में बदलाव की योजना नहीं है।
बताया जा रहा है कि गंभीर और अगरकर 2027 वर्ल्ड कप तक अपनी मौजूदा जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे। अगरकर का वर्तमान कार्यकाल सितंबर में समाप्त होना है, लेकिन नई संरचना के बावजूद चयन व्यवस्था में उनकी भूमिका जारी रहने की उम्मीद है।
गंभीर के टेस्ट क्रिकेट भविष्य पर भी नजर
हाल के महीनों में गौतम गंभीर के कोचिंग भविष्य को लेकर चर्चा होती रही है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के प्रदर्शन और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में उसकी स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं।
श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज को गंभीर के रेड बॉल कोचिंग भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सीरीज में टीम का प्रदर्शन आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति भी देख सकते हैं लक्ष्मण
लक्ष्मण अब तक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में जूनियर भारतीय टीमों, खिलाड़ियों के रिहैब और टैलेंट डेवलपमेंट से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम संभालते रहे हैं।
डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट बनने के बाद उनकी जिम्मेदारियों का दायरा और बढ़ सकता है। कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति में भी उनकी भागीदारी रहने की संभावना है।
इस तरह BCCI एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना चाहता है जिसमें खिलाड़ियों के विकास, फिटनेस, चयन और सीनियर टीम तक पहुंचने की प्रक्रिया के बीच स्पष्ट तालमेल बना रहे।
दूसरे देशों में कैसे काम करता है यह मॉडल
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट की भूमिका मुख्य रूप से रणनीतिक होती है। इस पद पर मौजूद व्यक्ति टीमों की दीर्घकालिक योजना, खिलाड़ियों के विकास और विभिन्न क्रिकेट संरचनाओं के बीच समन्वय की निगरानी करता है।
BCCI भी इसी तरह के मॉडल के जरिए भारतीय क्रिकेट के अलग अलग स्तरों को अधिक व्यवस्थित तरीके से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में मिलती हैं आधुनिक सुविधाएं
बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस BCCI का हाई परफॉर्मेंस सेंटर है। यहां खिलाड़ियों की कोचिंग, फिटनेस, स्पोर्ट्स साइंस, चोट से उबरने और रिहैब से संबंधित काम किया जाता है।
इसे पुरानी नेशनल क्रिकेट एकेडमी का आधुनिक रूप माना जाता है। लगभग 40 एकड़ में फैले इस परिसर में तीन अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैदान, इनडोर ट्रेनिंग सेंटर और 45 पिचों वाला आउटडोर नेट क्षेत्र मौजूद है।
इस व्यवस्था के कारण खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, फिटनेस और रिहैब से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलती हैं। यदि लक्ष्मण डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट बनते हैं तो उनका अनुभव इसी ढांचे को जूनियर से सीनियर क्रिकेट तक जोड़ने में उपयोग किया जा सकता है।