स्पेन ने फ्रांस को 2-0 से हराकर 16 साल बाद विश्व कप फाइनल में बनाई जगह

फीफा विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने फ्रांस को 2-0 से पराजित कर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। स्पेनिश टीम ने डलास में खेले गए मुकाबले में शुरू से अंत तक नियंत्रण बनाए रखा और 16 साल बाद एक बार फिर विश्व कप के खिताबी मुकाबले में पहुंची।

विश्व कप के 96 साल के इतिहास में यह केवल दूसरा मौका है, जब स्पेन ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया है। इससे पहले टीम 2010 में फाइनल तक पहुंची थी और नीदरलैंड्स को हराकर पहली बार विश्व चैंपियन बनी थी।

लुइस डे ला फुएंते की टीम ने फ्रांस के मजबूत आक्रमण को पूरी तरह शांत रखा। मिकेल ओयारजाबल ने पहले हाफ में पेनल्टी पर गोल किया, जबकि पेड्रो पोरो ने दूसरे हाफ में बढ़त दोगुनी कर स्पेन की जीत सुनिश्चित कर दी।

यूरोपीय चैंपियन के रूप में स्पेन ने बनाया खास रिकॉर्ड

स्पेन ने यूरो 2024 का खिताब जीतने के बाद मौजूदा यूरोपीय चैंपियन के रूप में विश्व कप 2026 के फाइनल में जगह बनाई है। इससे पहले भी जब स्पेन 2010 के विश्व कप फाइनल में पहुंचा था, तब वह यूरोप का मौजूदा चैंपियन था।

इस उपलब्धि के साथ स्पेन मौजूदा यूरो चैंपियन के रूप में दो अलग अलग विश्व कप फाइनल खेलने वाली केवल दूसरी टीम बन गई है।

इससे पहले पश्चिम जर्मनी ने यह कारनामा किया था। पश्चिम जर्मनी ने यूरो 1972 जीतने के बाद 1974 के विश्व कप फाइनल में प्रवेश किया था। इसके बाद उसने यूरो 1980 का खिताब जीतने के बाद 1982 के विश्व कप फाइनल के लिए भी क्वालीफाई किया था।

यदि स्पेन इस बार विश्व कप जीत जाता है, तो वह मौजूदा यूरोपीय चैंपियन के रूप में दो विश्व कप खिताब जीतने वाली पहली राष्ट्रीय टीम बन जाएगी।

जर्मनी ने यूरो 1972 का चैंपियन रहते हुए 1974 का विश्व कप जीता था। स्पेन ने भी यूरो 2008 जीतने के बाद 2010 में विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था।

अब स्पेन के पास यूरो 2024 के बाद विश्व कप 2026 जीतकर इतिहास में नया अध्याय जोड़ने का अवसर है।

स्पेन का 16 साल लंबा इंतजार समाप्त

स्पेन आखिरी बार 2010 में विश्व कप फाइनल में पहुंचा था। दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग में खेले गए उस मुकाबले में स्पेन ने अतिरिक्त समय में नीदरलैंड्स को हराकर अपना पहला विश्व कप जीता था।

उस ऐतिहासिक सफलता के बाद स्पेन का प्रदर्शन लगातार उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा।

2014 के विश्व कप में टीम मौजूदा चैंपियन के रूप में उतरी थी, लेकिन ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई। इसके बाद भी स्पेन कई प्रतियोगिताओं में अंतिम 16 के दौर से आगे नहीं बढ़ पाया।

विश्व कप 2026 में टीम ने पुराने निराशाजनक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए पहले नॉकआउट चरणों में जगह बनाई और फिर फ्रांस को हराकर फाइनल तक का सफर पूरा किया।

यह जीत स्पेन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि टीम ने टूर्नामेंट की सबसे मजबूत मानी जा रही टीमों में से एक को बिना गोल किए बाहर कर दिया।

ओयारजाबल और पोरो ने स्पेन के लिए किए गोल

फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में स्पेन ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और मुकाबले की गति को अपनी रणनीति के अनुसार चलाया।

मैच के 22वें मिनट में स्पेन को पेनल्टी मिली। मिकेल ओयारजाबल ने इस मौके को गोल में बदलते हुए अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई।

पहला गोल करने के बाद भी स्पेन ने पीछे हटकर खेलने के बजाय फ्रांस पर दबाव बनाए रखा। स्पेनिश मिडफील्ड ने फ्रांस के आक्रामक खिलाड़ियों को लगातार गेंद से दूर रखा।

दूसरे हाफ के 58वें मिनट में पेड्रो पोरो ने शानदार गोल करते हुए स्कोर 2-0 कर दिया। यह गोल फ्रांस के लिए मुकाबले में वापसी की उम्मीदों पर बड़ा झटका साबित हुआ।

फ्रांस ने अंतिम समय तक गोल करने की कोशिश की, लेकिन स्पेन की रक्षापंक्ति ने हर हमले को रोक दिया।

स्पेन ने टूर्नामेंट में एक और क्लीन शीट दर्ज की और फ्रांस को गोल करने का कोई स्पष्ट अवसर नहीं दिया।

फ्रांस का खतरनाक आक्रमण रहा बेअसर

फ्रांस सेमीफाइनल से पहले विश्व कप की सबसे खतरनाक आक्रमण करने वाली टीमों में शामिल था। टीम प्रतियोगिता में 16 गोल कर चुकी थी और उसके पास किलियन एम्बाप्पे जैसे विश्व स्तरीय खिलाड़ी मौजूद थे।

इसके बावजूद स्पेन के खिलाफ फ्रांस का आक्रमण पूरी तरह प्रभावहीन नजर आया।

स्पेन ने मैदान के बीच में फ्रांस को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया। गेंद मिलने के बाद फ्रांसीसी खिलाड़ियों को तुरंत दबाव का सामना करना पड़ा, जिससे वे नियमित रूप से गोल के मौके नहीं बना सके।

स्पेन की रक्षात्मक व्यवस्था इतनी मजबूत रही कि फ्रांस के प्रमुख फॉरवर्ड पूरे मुकाबले में स्पेनिश गोलकीपर के लिए गंभीर खतरा नहीं बन पाए।

यह 2010 के बाद पहला अवसर रहा, जब फ्रांस को किसी विश्व कप मैच में दो गोल के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

एम्बाप्पे के खिलाफ यामाल का रिकॉर्ड बरकरार

फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे से सेमीफाइनल में बड़ी भूमिका की उम्मीद थी, लेकिन वह अपनी टीम के लिए गोल नहीं कर सके।

स्पेन ने एम्बाप्पे को खुली जगह देने से बचते हुए उनके प्रभाव को सीमित रखा। फ्रांसीसी स्टार ने कुछ प्रयास जरूर किए, लेकिन वह मुकाबले का परिणाम बदलने में सफल नहीं हुए।

दूसरी ओर, स्पेन के युवा खिलाड़ी लामिन यामाल का एम्बाप्पे के खिलाफ नॉकआउट मैचों में शानदार रिकॉर्ड कायम रहा।

जब भी यामाल ने नॉकआउट मुकाबले में एम्बाप्पे की टीम का सामना किया है, तब उनकी टीम को हार नहीं मिली है। विश्व कप सेमीफाइनल में भी यह सिलसिला जारी रहा।

हालांकि यामाल इस मैच में गोल नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने स्पेन के आक्रमण में गति बनाए रखी और फ्रांस के डिफेंडरों को लगातार व्यस्त रखा।

फाइनल में इंग्लैंड या अर्जेंटीना से होगा सामना

स्पेन का सामना विश्व कप फाइनल में इंग्लैंड या अर्जेंटीना से होगा। दोनों टीमें दूसरे सेमीफाइनल में आमने सामने होंगी।

अर्जेंटीना मौजूदा विश्व चैंपियन है, जबकि इंग्लैंड लंबे समय बाद विश्व कप फाइनल में पहुंचने का प्रयास करेगा।

स्पेन पहले ही यूरोपीय चैंपियन के रूप में अपनी ताकत साबित कर चुका है। फ्रांस के खिलाफ मिली जीत के बाद टीम को विश्व कप खिताब का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

विश्व कप 2026 का फाइनल मुकाबला 20 जुलाई को खेला जाएगा। स्पेन उस मैच में दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरेगा।

गोल्डन बूट की दौड़ में एम्बाप्पे आगे

पहले सेमीफाइनल के बाद गोल्डन बूट की दौड़ में किलियन एम्बाप्पे शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं।

फ्रांस के टूर्नामेंट से बाहर होने के कारण अब एम्बाप्पे अपने गोलों की संख्या नहीं बढ़ा पाएंगे। इससे अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी सहित अन्य खिलाड़ियों के पास उन्हें पीछे छोड़ने का अवसर है।

मेसी दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मैदान पर उतरेंगे। यदि वह गोल करते हैं और अर्जेंटीना फाइनल में पहुंचता है, तो उनके पास गोल्डन बूट की दौड़ में पहला स्थान हासिल करने का मजबूत मौका होगा।

लेखक के बारे में
क्रिकेट विशेषज्ञ

1987 में कोलकाता में पैदा हुए रोहन शर्मा ने 2012 में पुणे विश्वविद्यालय से स्पोर्ट्स सांख्यिकी में मास्टर्स की डिग्री पूरी की। 2013 से 2020 तक, उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड के साथ सहयोग किया, खिलाड़ियों के एनालिटिक्स और खेल रणनीति के अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित किया। शर्मा ने 16 शैक्षिक पेपर लिखे हैं, मुख्य रूप से गेंदबाजी तकनीकों के विकास और फ़ील्ड प्लेसमेंट के परिवर्तन का समर्थन किया। 2021 में, उन्होंने पत्रकारिता में परिवर्तन किया। शर्मा वर्तमान में क्रिकेट पर विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं, मैच गतिकी और खिलाड़ी रणनीतियों पर दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं, नियमित रूप से विभिन्न खेल-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्मों में योगदान करते हैं।

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