वैभव सूर्यवंशी अब पात्र हैं, लेकिन टीम इंडिया की राह अभी भी आसान नहीं

वैभव सूर्यवंशी के 15 साल पूरे होते ही उनके आसपास की चर्चा ने नया मोड़ ले लिया है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया कि वह भविष्य में भारत के लिए खेलेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि उन्हें यह मौका कितनी जल्दी मिल सकता है।

आईसीसी के नियमों के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी 15 साल की उम्र पूरी करने के बाद ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए योग्य माना जाता है। वैभव अब उस सीमा को पार कर चुके हैं, इसलिए तकनीकी रुकावट खत्म हो गई है। लेकिन पात्र होना और टीम में चुना जाना, दोनों एक जैसी बात नहीं हैं।

उम्र की शर्त पूरी, मगर चयन का रास्ता अलग है

अब तक वैभव के बारे में यही कहा जाता था कि वह बेहद कम उम्र के कारण अभी इंतजार की स्थिति में हैं। अब वह चरण पीछे छूट गया है और औपचारिक तौर पर उनके लिए अंतरराष्ट्रीय दरवाजा खुल चुका है।

फिर भी चयन केवल उम्र के आधार पर नहीं होता। टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए मौजूदा प्रतिस्पर्धा, टीम संतुलन, फॉर्म और सही समय, सब कुछ मायने रखता है। यही वजह है कि उनकी पात्रता पूरी होने के बाद भी तुरंत चयन तय नहीं माना जा सकता।

कम उम्र में जो किया, उसने सबका ध्यान खींच लिया

वैभव की प्रगति सामान्य नहीं रही है। बहुत छोटी उम्र से ही उन्होंने स्थानीय क्रिकेट में अपने से बड़े गेंदबाजों पर असर डाला, फिर घरेलू स्तर पर लगातार प्रदर्शन किया और बाद में बड़े मंचों पर भी खुद को साबित किया।

आईपीएल में तेज शुरुआत, अंडर 19 स्तर पर भारी रन, और फिर रणजी ट्रॉफी व विजय हजारे जैसे टूर्नामेंट में उपयोगी प्रदर्शन ने यह दिखा दिया कि उनकी बल्लेबाजी सिर्फ एक फॉर्मेट तक सीमित नहीं है। यही कारण है कि उन्हें केवल प्रतिभाशाली युवा नहीं, बल्कि लंबे समय की संभावना वाले खिलाड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

जल्द मौका देना चाहिए या सही समय का इंतजार करना चाहिए

यहीं से सबसे बड़ा सवाल शुरू होता है। भारतीय क्रिकेट में पहले भी बहुत कम उम्र में खिलाड़ियों को मौका मिला है और कुछ ने उस भरोसे को सही भी साबित किया है। लेकिन हर प्रतिभा का सफर अलग होता है और हर खिलाड़ी के लिए सही समय भी अलग होता है।

मौजूदा भारतीय टीम में ऊपरी क्रम पहले से काफी मजबूत है। ऐसे में चयनकर्ता शायद वैभव को सीधे बड़े स्तर पर धकेलने के बजाय पहले सही मंच तलाशना चाहेंगे। एशियन गेम्स जैसे टूर्नामेंट इस लिहाज से उपयोगी हो सकते हैं, जहां युवा खिलाड़ियों को परखा जा सकता है और बिना जरूरत से ज्यादा दबाव डाले उन्हें अंतरराष्ट्रीय माहौल दिया जा सकता है।

उनके आंकड़े बताते हैं कि चर्चा यूं ही नहीं हो रही

वैभव ने पिछले एक साल में जो किया है, उसने संदेह काफी कम कर दिए हैं। बड़े मंच पर तेज रन बनाना, उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्वता दिखाना और लगातार अलग अलग स्तरों पर असर छोड़ना, यह सब उनकी चर्चा को मजबूत बनाता है।

अंडर 19 विश्व कप में उनके रन और स्ट्राइक रेट ने भी यही साबित किया कि वह सिर्फ संभावनाओं के खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि मैच पर असर डालने की क्षमता भी रखते हैं। जब कोई बल्लेबाज अपने से काफी बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ इस तरह खेलता है, तो चयनकर्ताओं का ध्यान स्वाभाविक रूप से उसकी ओर जाता है।

आईसीसी नियम ने रास्ता खोला है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है

आईसीसी ने नवंबर 2020 में यह नियम लागू किया था कि कोई खिलाड़ी 15 साल से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेलेगा। इसका मकसद युवा खिलाड़ियों को बहुत जल्दी दबाव में डालने से बचाना और उनके विकास को संतुलित रखना था।

अब वैभव इस नियम की शर्त पूरी कर चुके हैं। इसका मतलब यह है कि अगला फैसला अब केवल क्रिकेट से जुड़ा होगा। अगर चयनकर्ता मानते हैं that वह तैयार हैं, तो उन्हें मौका मिल सकता है। अगर नहीं, तो उन्हें थोड़ा और समय दिया जाएगा। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि भारतीय क्रिकेट ने एक असाधारण प्रतिभा को अपने सामने आते देख लिया है, और अब सबकी नजर इस पर है कि अगला कदम कब उठता है।

लेखक के बारे में
क्रिकेट विशेषज्ञ

1987 में कोलकाता में पैदा हुए रोहन शर्मा ने 2012 में पुणे विश्वविद्यालय से स्पोर्ट्स सांख्यिकी में मास्टर्स की डिग्री पूरी की। 2013 से 2020 तक, उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड के साथ सहयोग किया, खिलाड़ियों के एनालिटिक्स और खेल रणनीति के अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित किया। शर्मा ने 16 शैक्षिक पेपर लिखे हैं, मुख्य रूप से गेंदबाजी तकनीकों के विकास और फ़ील्ड प्लेसमेंट के परिवर्तन का समर्थन किया। 2021 में, उन्होंने पत्रकारिता में परिवर्तन किया। शर्मा वर्तमान में क्रिकेट पर विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं, मैच गतिकी और खिलाड़ी रणनीतियों पर दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं, नियमित रूप से विभिन्न खेल-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्मों में योगदान करते हैं।

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