
न्यूजीलैंड सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन
न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में संजू सैमसन का बल्ला पूरी तरह खामोश रहा है। पहले मैच में 10 रन दूसरे में 6 रन और तीसरे में डक पर आउट होने के बाद अब उनकी टीम इंडिया में जगह पर सवाल उठने लगे हैं। वर्ल्ड कप से ठीक पहले यह मौका खुद को साबित करने का था लेकिन संजू ने इसे गंवा दिया।
भारत के पूर्व कोच और क्रिकेट विशेषज्ञ डब्ल्यूवी रमन ने उनकी तकनीक और मानसिकता पर विस्तार से बात की है।
तकनीकी खामी: फिक्स्ड बैट स्पीड
रमन के अनुसार संजू की सबसे बड़ी समस्या उनकी बल्ले की डाउनस्विंग स्पीड में है। उन्होंने कहा कि सैमसन हर गेंदबाज के खिलाफ एक ही गति से बल्ला चलाते हैं।
- उनकी डाउनस्विंग 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गेंदों के लिए अनुकूलित है।
- जब गेंदबाज गति बदलता है या बहुत तेज या बहुत धीमी गेंद डालता है तो संजू अपनी स्पीड को एडजस्ट नहीं कर पाते।
रमन ने इसे कार चलाने से तुलना की जहां आपको सड़क की स्थिति के अनुसार स्पीड बदलनी पड़ती है। आप हर जगह एक ही स्पीड से नहीं चल सकते।
मानसिक दबाव और प्रतिस्पर्धा
तकनीक के अलावा रमन ने सैमसन की मानसिकता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में जगह बनाए रखने की भारी प्रतिस्पर्धा का असर उनके प्रदर्शन पर दिख रहा है।
- संजू हर मौके पर खुद को साबित करने के दबाव में रहते हैं जिससे उनकी स्वाभाविक खेल शैली प्रभावित होती है।
- इसी कारण वे मैदान पर शांत होकर नहीं खेल पा रहे हैं और गलत समय पर गलत शॉट चुन रहे हैं।
आगे की राह और सलाह
रमन ने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने के लिए संजू को अपनी बल्लेबाजी में लचीलापन लाना होगा। उन्हें गेंदबाजों की गति पढ़ने और उसके अनुसार हाथों व बल्ले की स्पीड एडजस्ट करने पर काम करने की जरूरत है।
सीरीज में संजू के पास अब बहुत कम मौके बचे हैं। अगर वे जल्द ही बड़ा स्कोर नहीं बनाते तो टीम में उनकी जगह पर खतरा मंडरा सकता है। युवा खिलाड़ियों की अच्छी फॉर्म और प्रतिस्पर्धा उन्हें और दबाव में डाल रही है।