
सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स ने शुरुआत तो दमदार की, लेकिन मैच के बीच में हुई दो बड़ी गलतियों ने पूरी कहानी बदल दी। बल्लेबाजी के दौरान रन चुराने की कोशिश में हुए दो रन आउट ऐसे साबित हुए, जिन्होंने टीम की लय तोड़ी और अंत में हार की नींव रख दी।
मैच के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की रही कि अगर KKR थोड़ी और समझदारी दिखाती, तो नतीजा शायद बिल्कुल अलग हो सकता था।
तेज शुरुआत के बाद खुद ही फंस गई कोलकाता
कोलकाता की पारी की शुरुआत काफी आक्रामक रही। बल्लेबाजों ने शुरुआती ओवरों में तेजी से रन बटोरे और ऐसा लग रहा था कि टीम बड़ा स्कोर खड़ा कर सकती है। लेकिन इसी बीच जल्दबाजी में लिए गए फैसलों ने पारी की मजबूती को झटका देना शुरू कर दिया।
टीम की बल्लेबाजी में दो अलग रंग दिखे। एक तरफ आक्रमण था, दूसरी तरफ लापरवाही। और आखिर में वही लापरवाही भारी पड़ गई।
कैमरन ग्रीन का रन आउट बना पहला बड़ा झटका
कैमरन ग्रीन से टीम को बड़े योगदान की उम्मीद थी, लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं सके। छठे ओवर में उनका रन आउट होना KKR के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ। उस समय स्कोर अच्छा था और टीम को जरूरत थी कि कोई बल्लेबाज पारी को आगे बढ़ाए।
ग्रीन का विकेट सामान्य विकेट नहीं था। यह ऐसा मौका था, जहां बिना बड़ा शॉट खेले भी टीम नियंत्रण में रह सकती थी। लेकिन रन लेने की गलत कोशिश ने कोलकाता को तीसरा बड़ा झटका दे दिया।
रघुवंशी की गलती ने पूरी पारी की कमर तोड़ दी
अंगकृष रघुवंशी अच्छी लय में दिख रहे थे और उन्होंने अपनी पारी में लगातार बाउंड्री लगाकर दबाव हटाया। ऐसा लग रहा था कि वह पारी को अंत तक ले जा सकते हैं। लेकिन अर्धशतक के बाद उनका रन आउट होना मैच का सबसे निर्णायक मोड़ बन गया।
इस बार तालमेल की कमी साफ नजर आई। रिंकू सिंह के साथ संवाद ठीक नहीं बैठा और नतीजा यह हुआ कि सेट बल्लेबाज को बीच पारी में लौटना पड़ा। दिलचस्प बात यह भी रही कि एक मौके पर वह पहले बच गए थे, लेकिन दूसरी बार किस्मत ने साथ नहीं दिया।
अगर ये दो विकेट न गिरते, तो तस्वीर बदल सकती थी
क्रिकेट में हर विकेट अहम होता है, लेकिन रन आउट का असर अक्सर थोड़ा ज्यादा गहरा होता है, क्योंकि उसमें विपक्ष से ज्यादा आपकी अपनी गलती होती है। KKR के साथ भी यही हुआ।
अगर ग्रीन और रघुवंशी दोनों थोड़ा और टिकते, और टीम पूरे ओवर खेलती, तो स्कोर कहीं ज्यादा मजबूत हो सकता था। यही वह अंतर था, जिसने मुकाबले को धीरे धीरे हैदराबाद की तरफ मोड़ दिया।
साझेदारियां नहीं बन सकीं, यही हार की असली वजह बनी
कोलकाता की पूरी पारी में सिर्फ एक अहम साझेदारी ही बन सकी। टी20 में यह अक्सर हार की वजह बनता है, खासकर तब जब शुरुआत तेज मिली हो। एक के बाद एक विकेट गिरते रहे और बल्लेबाजी की रफ्तार टूटती चली गई।
रिंकू सिंह ने उपयोगी पारी जरूर खेली, लेकिन उन्हें भी पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। जब बीच के ओवरों में स्थिरता नहीं बनती, तो आखिरी ओवरों में बड़ा धमाका करना मुश्किल हो जाता है।
SRH ने मौके का फायदा उठाया और क्लासेन ने काम खत्म किया
सनराइजर्स की पारी में भी एक समय हल्की लड़खड़ाहट आई थी, जब टीम ने बहुत कम अंतराल में तीन विकेट गंवाए। उस समय KKR के पास वापसी का मौका था। लेकिन हैदराबाद ने घबराहट नहीं दिखाई।
हेनरिक क्लासेन ने जिम्मेदारी संभाली और तेज, नियंत्रित बल्लेबाजी से मैच को अपनी टीम की तरफ मोड़ दिया। वहीं KKR सिर्फ यह सोचती रह गई कि अगर वे अपने दो रन आउट बचा लेते, तो शायद कहानी दूसरी होती।
हार की सबसे बड़ी सीख, जल्दबाजी से बड़ा नुकसान
इस मुकाबले ने एक बार फिर याद दिला दिया कि टी20 में सिर्फ तेजी से रन बनाना काफी नहीं होता, सही फैसले लेना भी उतना ही जरूरी है। KKR ने बल्लेबाजी में अच्छी शुरुआत की, लेकिन छोटी सी जल्दबाजी ने बड़ी कीमत वसूल ली।
अंत में स्कोरबोर्ड पर हार दर्ज हुई, लेकिन मैच की असली कहानी दो ऐसे रन आउट में छिपी रही, जिनसे कोलकाता कभी पूरी तरह उबर ही नहीं सकी।