
घरेलू मैदान पर अक्षर को बेंच पर बिठाना बड़ी भूल
मोटेरा स्टेडियम अक्षर पटेल का घरेलू मैदान है। वह पिच की गति, ग्रिप और एंगल को अच्छी तरह समझते हैं। रात में रोशनी के नीचे पिच कैसे बदलती है, कब ढीली पड़ती है और मिडिल ओवर में दबाव बनाने के लिए क्या करना चाहिए – यह सब अक्षर की ताकत है। सफेद गेंद क्रिकेट में उनका करियर इसी समझ पर टिका है।
फिर भी जब टीम को गेंदबाजी में नियंत्रण और मध्यक्रम में स्थिरता की जरूरत थी, उसी खिलाड़ी को बाहर कर दिया गया। यह सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि ड्रेसिंग रूम की उलझी सोच की झलक थी। टीम ने एक तरह के मैच की तैयारी की थी, लेकिन परिस्थितियां बदलने पर खुद को ढाल नहीं सकी। दक्षिण अफ्रीका ने इसी का फायदा उठाया।
सहायक कोच ने माना – सुंदर का चयन उल्टा पड़ गया
सहायक कोच रयान टेन डूशेट ने खुलासा किया कि वॉशिंगटन सुंदर को चुनने का फैसला मैच-अप थ्योरी पर आधारित था। टीम ने सोचा था कि सुंदर पावरप्ले में अच्छी गेंदबाजी करेंगे और दक्षिण अफ्रीका के बाएं हाथ के बल्लेबाजों को रोकेंगे। लेकिन मैच उस स्क्रिप्ट पर नहीं चला।
पावरप्ले में सुंदर को गेंदबाजी का मौका ही नहीं मिला। पांच ओवर में दक्षिण अफ्रीका ने 3 विकेट पर सिर्फ 30 रन बनाए। इसके बाद मिडिल ओवर में मिलर की अगुवाई में दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों ने खुलकर खेला। सुंदर वहां दबाव में फंस गए और प्रभाव डाल नहीं सके।
टेन डूशेट ने कहा, “हमने सोचा था कि सुंदर पावरप्ले में दो ओवर डालेंगे।” लेकिन टी20 क्रिकेट स्क्रिप्ट के मुताबिक नहीं चलता। जहां अक्षर मिडिल ओवर में नियंत्रण बनाने के माहिर हैं, वहां सुंदर काम नहीं कर सके।
गंभीर और सूर्या को व्यवहारिक सोच अपनानी होगी
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस के समय अक्षर को बाहर करने के फैसले को “कठोर” बताया। लेकिन यह फैसला नासमझी का दूसरा रूप साबित हुआ। बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने कहा कि सूर्या और गौतम ने इस पर बात की और ऑफ स्पिनर को जरूरी समझा। लेकिन योजना जल्दी बिखर गई।
अक्षर की खासियत मिडिल ओवर में लंबाई और गति में बदलाव कर बल्लेबाजों को बांधना है। उन्होंने पहले कहा था कि उन्हें पता है कब लंबाई पीछे खींचनी है और कब फुल गेंद डालनी है।
अब गौतम गंभीर और सूर्यकुमार के लिए पहला नियम व्यवहारिक सोच होना चाहिए। चयन अनुमान पर नहीं, परिस्थितियों के अनुसार होना चाहिए। अक्षर को बाहर रखना भारत की हार का सबसे बड़ा कारण बन गया।